Fight Club Review: ‘फाइट क्लब’ की कहनी दिमाग की दही कर देगी !


Fight Club Review: हमारे एक और बेहतरीन आर्टिकल में आपका स्वागत है. आज के इस आर्टिकल में हम फाइट क्लब रिव्यू (Fight Club Review) के बारे में बात करने जा रहे हैं. यह एक बहुप्रतिक्षित फिल्म है. इसे साउथ सिनेमा के जाने-माने फिल्म मेकर ने निर्मित किया है. इस बेहतरीन फिल्म को लोकेश कनगराज ने निर्मित किया है. लोकेश कनकराज अपनी फिल्मों में बेहतरीन निर्देशन के लिए काफी प्रसिद्ध है. हाल ही में लोकेश कनगराज के बैनर तले बनी हुई दमदार फिल्म फाइट क्लब सिनेमाघर में दस्तक दे चुकी है. इस फिल्म को अब्बास ए रहमत ने निर्देशित किया है. इस फिल्म का विषय उत्तर चेन्नई के ऊपर निर्भर है.

कहानी के रूप में हमें धोखा बदला और खुद के अस्तित्व की रक्षा करने के लिए की जाने वाली लड़ाई घुमा फिरा कर दिखाई जाती है. इस फिल्म के निर्देशन में काफी दम दिखता है. फिल्म (Fight Club Review) को क्रिटिक्स ने भी हरी झंडी दिखाई है. फिल्म में आपको एक से बढ़कर एक दिग्गज कलाकार देखने को मिल जाएंगे. इन कलाकारों ने अपने बेहतरीन अभिनेता का प्रदर्शन करते हुए फिल्म को अगले स्तर का बना दिया है. फिल्म दर्शकों के ऊपर एक अलग ही छाप छोड़कर जाएगी.

Fight Club Review

Fight Club Review

यह फिल्म उतरी चेन्नई के विषय पर आधारित है. फिल्म में हमें मारधाड़ एवं एक्शन देखने को मिलता है. फिल्म के सिनेमैटोग्राफी की बात करें तो हमें औसत दर्जे की सिनेमैटोग्राफी देखने को मिलती है. वही इस फिल्म के लेखन पर एक नजर डाला जाए तो लेखन शानदार है. लेखन के साथ ही इस फिल्म के निर्देशन में अब्बास ए रहमत ने कुछ नया करने की कोशिश की है. एक्टिंग की बात करें तो लगभग सारे एक्टर्स ने ठीक-ठाक एक्टिंग का प्रदर्शन किया है. इस फिल्म की रिव्यु (Fight Club Review) अच्छी खासी है.

Fight Club Story

Fight Club Review के साथ ही हम इसके कहनी पर नज़ार डालते है. फिल्म की कहानी मुख्य रूप से चेन्नई के उन लोगों के ऊपर है,जो ड्रग्स और गुंडागर्दी करते हैं. इस फिल्म में कार्तिकेय संथानम चाहता है कि वह सब लोग यह सब छोड़कर स्पोर्ट्स के ऊपर ध्यान दें. फिल्म में विजय कुमार ने सेल्वा का किरदार निभाया है. सेल्वा एक अच्छा फुटबॉलर रहता है. एक हत्या के आरोप में बुरी तरीके से फंस जाता है. इसी तरीके कहानी आगे बढ़ती है और सेल्वा उन लोगों से बदला लेने की मन बना लेता है.

फर्स्ट हाफ भाग कैसा है?

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फिल्म का पहला भाग दर्शकों को सीट पर बांधे रखने में पूर्ण रूप से सक्षम है. फिल्में किरूबा विलन होता है. जिसका कहानी में एक अहम किरदार है, लेकिन इन सब के बीच फिल्में एक नकारात्मक बिंदु यह है कि इतने किरदार होने के बाद भी किरदारों का आपस में किसी भी प्रकार का मेल नहीं बैठ पाता है. वहीं दूसरे भाग में हमें प्रेम कहानी दिखाई जाती है जो शायद दर्शकों का ध्यान अपने तरफ आकर्षित करें.

फिल्म दिख रही उद्देश्यहीन

Fight Club Review में इसे उद्देश्यहीन भी बताया जा रहा है. बड़े ही गहराई के साथ इस फिल्म पर एक नजर डाला जाए तो हम देख सकते हैं कि पहले आधे भाग में फिल्म में लड़ाई झगड़ा और बदले जैसी भावनाओं को मुख्य बिंदु बनाकर दर्शकों के समक्ष पेश किया जा रहा था. लेकिन दूसरे भाग में कहानी बिल्कुल पलट जाती है. मुख्य बिंदु के रूप में एक प्रेम कहानी लोगों के सामने आ जाती है. यह दोनों चीज आपस में मेल नहीं खा रही हैं. शायद यह दर्शकों को यह बात अटक जाए.

कैसा है टेक्निकल वर्क

तकनीकी प्रतिभा फिल्म में अच्छी खासी दिखाई गई है. सिनेमैटोग्राफी भी ठीक-ठाक है. कई लोग इस फिल्म के सिनेमैटोग्राफी की खास कर तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. दक्षिण भारत की फिल्मों में सिनेमैटोग्राफी अव्वल दर्जे की देखी जा रही है. शायद इस फिल्म की सिनेमैटोग्राफी भी दर्शकों को अपने तरफ आकर्षित करें.यह लोकेश कनगराज की एक प्रयोग हो सकती है.

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